Haryana Govt Decision: श्रमिकों को बड़ी राहत, अब 60 दिन में मिलेगी शिक्षा, शादी और इलाज से जुड़ी सरकारी सहायता
Haryana Government Decision: Workers get major relief, now government assistance related t
हरियाणा सरकार ने श्रमिकों को सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत दिलाने के लिए एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। सरकार ने हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड की 29 सेवाओं को सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत शामिल कर दिया है। इसके तहत अब श्रमिकों और उनके परिवारों को शिक्षा, शादी, इलाज, खेल और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सरकारी सहायता निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
सरकार ने इस फैसले के साथ श्रम कल्याण अधिकारी से लेकर श्रम आयुक्त तक स्पष्ट जवाबदेही भी तय कर दी है। यदि तय समय में सेवा या सहायता नहीं दी जाती है, तो संबंधित अधिकारी जिम्मेदार माने जाएंगे।
बच्चों की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं तक मिलेगा लाभ
नई व्यवस्था के तहत श्रमिकों के पहली से बारहवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल यूनिफॉर्म, किताब-कॉपी, छात्रवृत्ति और व्यावसायिक कोर्स के लिए आर्थिक सहायता 60 दिनों के भीतर प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही यूपीएससी और एचपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए भी वित्तीय सहायता तय समय में दी जाएगी, जिससे श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
शादी, इलाज और खेल-कूद के लिए भी तय समयसीमा
सरकार की इस पहल के तहत श्रमिकों के बेटा-बेटियों की शादी के लिए कन्यादान और शगुन योजना, महिलाओं की डिलीवरी, दांतों के इलाज, चश्मा, साइकिल, सिलाई मशीन, एलटीसी, कृत्रिम अंग, श्रवण यंत्र और दिव्यांगों के लिए तिपहिया वाहन जैसी सुविधाओं के लिए भी 60 दिन के भीतर सहायता राशि जारी की जाएगी।
इसके अलावा खेल और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले श्रमिकों और उनके बच्चों को भी समय पर आर्थिक मदद मिलेगी।
मृत्यु के बाद आश्रितों को 15 दिन में सहायता
सरकार ने यह भी तय किया है कि किसी श्रमिक की मृत्यु होने की स्थिति में उसके आश्रितों को आर्थिक सहायता, मुख्यमंत्री सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ, दाह संस्कार सहायता और अन्य मृत्यु उपरांत सुविधाएं 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से श्रमिकों को सम्मानजनक जीवन, आर्थिक सुरक्षा और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी। साथ ही प्रशासन पर उनका भरोसा और मजबूत होगा। यह फैसला श्रमिक कल्याण की दिशा में एक बड़ा और प्रभावी कदम माना जा रहा है।